EPFO Pension Calculation 2025 – EPFO पेंशन कैलकुलेशन 2025 को लेकर लाखों कर्मचारियों में उत्सुकता बनी हुई है, क्योंकि रिटायरमेंट के समय मिलने वाली पेंशन की गणना सीधे तौर पर उनकी भविष्य की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित करती है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा चलाए जा रहे पेंशन स्कीम के अंतर्गत, पेंशन राशि का निर्धारण कर्मचारी की अंतिम बेसिक सैलरी, सेवा अवधि और निर्धारित EPS फॉर्मूले के आधार पर होता है। वर्तमान में पेंशन की गणना फॉर्मूले [पेंशन योग्य वेतन × सेवा अवधि ÷ 70] के आधार पर की जाती है, जिसमें अधिकतम पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 तय है। यानी यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि 30 साल रही है, तो उसे अधिकतम ₹6,428 तक की मासिक पेंशन मिल सकती है।

EPFO द्वारा पेंशन कैलकुलेशन का मौजूदा फॉर्मूला
EPFO के पेंशन कैलकुलेशन फॉर्मूले के तहत कर्मचारी की मासिक पेंशन इस तरह से तय होती है: “पेंशन योग्य वेतन × कुल सेवा अवधि ÷ 70″। पेंशन योग्य वेतन का तात्पर्य अधिकतम ₹15,000 से है, जो कि EPFO द्वारा फिक्स किया गया है, भले ही कर्मचारी की वास्तविक बेसिक सैलरी इससे अधिक हो। उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि 30 साल है और उसका पेंशन योग्य वेतन अधिकतम सीमा ₹15,000 है, तो पेंशन होगी ₹15,000 × 30 ÷ 70 = ₹6,428। इस फॉर्मूले में सेवा की न्यूनतम अवधि 10 वर्ष और अधिकतम सीमा 35 वर्ष मानी जाती है।
2025 में तय पेंशन सीमा को लेकर चल रही संभावनाएं
EPFO पेंशन योजना को लेकर 2025 में कई संभावित बदलावों की चर्चा हो रही है। महंगाई में तेजी, जीवनयापन की लागत में बढ़ोतरी और पेंशनधारकों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए सरकार पेंशन सीमा बढ़ाने पर विचार कर सकती है। मौजूदा अधिकतम पेंशन ₹6,428 को बढ़ाकर ₹9,000 या ₹10,000 तक करने की मांग की जा रही है। इसके लिए पेंशन योग्य वेतन की सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 तक करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। यदि ऐसा होता है, तो पेंशन कैलकुलेशन का फॉर्मूला उसी आधार पर लागू होगा, जिससे मासिक पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
कर्मचारी के योगदान और रिटायरमेंट उम्र का असर
EPFO पेंशन की राशि केवल वेतन और सेवा अवधि पर नहीं, बल्कि कर्मचारी द्वारा EPF खाते में किए गए कुल योगदान और रिटायरमेंट की उम्र पर भी निर्भर करती है। जो कर्मचारी 58 वर्ष की उम्र तक सेवाएं देते हैं, उन्हें EPFO द्वारा ‘फुल पेंशन’ दी जाती है, जबकि समय से पहले रिटायर होने वाले कर्मचारियों को ‘रिड्यूस्ड पेंशन’ मिलती है। इसके अतिरिक्त, यदि कर्मचारी ने EPS स्कीम के तहत अधिक समय तक योगदान दिया है, तो उन्हें ‘लॉयल्टी बोनस’ के रूप में अतिरिक्त पेंशन भी मिल सकती है। उदाहरणस्वरूप, यदि कोई व्यक्ति 35 वर्ष से अधिक समय तक सेवा देता है, तो उसकी पेंशन में 2 साल का अतिरिक्त क्रेडिट भी जोड़ा जा सकता है। यह नियम उन लोगों के लिए है जो लगातार लंबी सेवा प्रदान करते हैं और EPFO में लगातार योगदान करते हैं। अतः सेवा अवधि के साथ-साथ सही उम्र में रिटायर होना भी पेंशन कैलकुलेशन के लिए महत्त्वपूर्ण है।
EPS स्कीम और पेंशन लिमिट पर सरकार की स्थिति
सरकार EPS स्कीम के अंतर्गत चल रही पेंशन लिमिट को लेकर नए सिरे से विचार कर रही है। EPFO की नई समितियां लगातार सुझाव दे रही हैं कि ₹15,000 की मौजूदा लिमिट अब समय के अनुसार अपर्याप्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी उच्च पेंशन की मांग पर फैसले दिए जा चुके हैं, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ा है। श्रम मंत्रालय ने इस पर सुझाव मांगे हैं और यह संभावना जताई जा रही है कि 2025 में EPFO नई पेंशन लिमिट लागू कर सकता है।
