12 Day School Holiday – त्योहारों और छुट्टियों के मौसम की शुरुआत के साथ ही स्कूलों में बच्चों के लिए एक शानदार तोहफा सामने आया है — 12 दिन की लंबी छुट्टी की घोषणा। यह छुट्टियाँ बच्चों के लिए मस्ती और मनोरंजन का बेहतरीन मौका लेकर आई हैं। माता-पिता के लिए भी यह राहत भरा समय है क्योंकि उन्हें अपने बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का अवसर मिलेगा। कोरोना के बाद शिक्षा प्रणाली में तेजी से बदलाव आया है और बच्चे लगातार पढ़ाई में व्यस्त रहे हैं, ऐसे में यह ब्रेक मानसिक रूप से भी उन्हें तरोताजा कर देगा। इस अवधि में कई परिवार पिकनिक, छुट्टियों की ट्रिप या फिर गांव जाने की योजना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी पैरेंट्स और बच्चों की खुशी साफ दिखाई दे रही है। स्कूल प्रशासन ने इस छुट्टी के दौरान कोई होमवर्क नहीं देने का निर्णय लिया है ताकि बच्चे अपनी छुट्टियों को भरपूर मस्ती के साथ बिता सकें। यह समय बच्चों की रचनात्मकता को निखारने और माता-पिता के साथ उनके रिश्ते को मजबूत करने का भी मौका साबित हो सकता है।

बच्चों के लिए मजेदार एक्टिविटीज की बहार
इस 12 दिन की छुट्टियों के दौरान बच्चों के लिए मस्ती का पूरा पिटारा खुल चुका है। कुछ पैरेंट्स ने अपने बच्चों के लिए आर्ट और क्राफ्ट क्लासेज़, डांस, म्यूज़िक या स्पोर्ट्स क्लासेज़ में नामांकन करवा दिया है ताकि उनका समय रचनात्मक और उत्पादक तरीके से बिताया जा सके। वहीं कई घरों में बच्चों ने पहले से ही फिल्में देखने, वीडियो गेम्स खेलने और दोस्तों के साथ खेलने की योजना बना रखी है। बाजारों में बच्चों के लिए नए-नए खिलौने और गेम्स की बिक्री में भी अचानक उछाल देखा गया है। पार्कों और मॉल्स में भीड़ बढ़ने लगी है क्योंकि छुट्टियों में बच्चों को बाहर घुमाने ले जाना एक आम परंपरा बन चुकी है। इन छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए बच्चों के मनोरंजन चैनलों ने भी खास कार्यक्रमों की घोषणा की है। इन सब गतिविधियों का मकसद यही है कि बच्चे मोबाइल और स्क्रीन की लत से दूर रहें और अपनी छुट्टियों को पूरी ऊर्जा और खुशी के साथ बिता सकें।
माता-पिता को भी मिली राहत की सांस
पैरेंट्स के लिए यह छुट्टियाँ एक बड़ी राहत लेकर आई हैं। कामकाजी माता-पिता जो रोज़ सुबह बच्चों को स्कूल भेजने की भागदौड़ में रहते हैं, उन्हें अब कुछ दिनों के लिए सुबह-सुबह की इस दौड़ से छुटकारा मिला है। साथ ही, वे अब बच्चों के साथ ज्यादा समय बिता सकते हैं — चाहे वह साथ में नाश्ता करना हो, किसी ट्रिप की प्लानिंग करना हो या फिर घर पर ही कोई बोर्ड गेम खेलना हो। कुछ पैरेंट्स तो इन छुट्टियों को अपने वर्क फ्रॉम होम के साथ बैलेंस करके बच्चों को पढ़ाने और उनके साथ क्रिएटिव एक्टिविटीज करने में जुट गए हैं। यह छुट्टियाँ परिवारों को एक-दूसरे के करीब लाने का भी मौका बन रही हैं, खासकर उन पैरेंट्स के लिए जो सामान्य दिनों में ऑफिस और कामकाज में इतने व्यस्त रहते हैं कि बच्चों को समय नहीं दे पाते। कई स्कूलों ने इस दौरान पैरेंट्स मीटिंग भी आयोजित नहीं की है ताकि सभी आराम से यह समय बिता सकें।
यात्रा और पर्यटन में आई तेजी
12 दिन की छुट्टियों का असर देश के पर्यटन स्थलों पर भी साफ दिख रहा है। ट्रेन, बस और फ्लाइट टिकट्स की बुकिंग में तेजी आई है। विशेषकर हिल स्टेशन्स, धार्मिक स्थलों और समुद्री तटों पर पैरेंट्स अपने बच्चों के साथ घूमने जाने की तैयारी कर रहे हैं। होटल्स और रिज़ॉर्ट्स में भी एडवांस बुकिंग की खबरें सामने आई हैं। यह समय छोटे व्यापारियों, ट्रैवल एजेंसियों और टूर ऑपरेटर्स के लिए भी व्यस्त और लाभदायक साबित हो रहा है। कई राज्यों में सरकार ने भी पर्यटकों की भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। छुट्टियों का यह समय न सिर्फ बच्चों के लिए रिफ्रेशमेंट है, बल्कि पर्यटन उद्योग के लिए भी एक आर्थिक बूस्टर साबित हो रहा है।
स्कूलों की तैयारी और अभिभावकों की भूमिका
जहाँ एक ओर बच्चे और पैरेंट्स छुट्टियों का आनंद लेने में जुटे हैं, वहीं स्कूल प्रशासन भी अगले सेशन की तैयारी में लगा हुआ है। कई स्कूलों ने छुट्टियों के बाद आयोजित होने वाली परीक्षाओं की योजना बनानी शुरू कर दी है। वहीं, पैरेंट्स की जिम्मेदारी भी बनती है कि बच्चों की छुट्टियों का संतुलित उपयोग करें — उन्हें पूरी मस्ती करने दें, लेकिन साथ ही पढ़ाई से पूरी तरह दूरी भी न बनने दें। बच्चों को कहानियाँ पढ़ने, सामान्य ज्ञान बढ़ाने और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करने वाली गतिविधियों में शामिल करना फायदेमंद रहेगा। इस तरह छुट्टियाँ एक ऐसे दौर की तरह काम कर सकती हैं जो बच्चों की मानसिक, सामाजिक और रचनात्मक विकास में सहायक हो।
